गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

बूढ़ी नानी की पहेलियाँ

नीचे दिए हुए पहेली को पहेली बार मैंने अपनी बूढ़ी नानी, मेरी माँ की दादी, जाया देवी (१९००-१९९४), से सुना था. जरा बूझो तो जानें …  

रावण भगिनी का आदि ले, शत्रुपा का अंत
कपट मृगया का मध्य ले, सो मोहि देहु तुरंत


बूझो तो जानें के  द्वारा हमारा प्रयास है की पारम्परिक मनोरंजन की बातों, खेल, पहेलियाँ, इत्यादि को एकत्रित करें और उन्हें हमेशा के लुप्त होने से बचाएं। आपके सहयोग से ही हम सब मिलकर अपनी मौखिक परंपरा को आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रख सकते हैं। आपको भी यदि अपनी नानी-दादी से सुनी पहेलियाँ या अन्य रोचक बातें याद हों और अगर आप इस मुहीम में हिस्सा लेना चाहें तो हमें ज़रूर bujhotojaane@gmail.com पर लिख भेजें. हम उन्हें सहर्ष आपके नाम सहित बूझो तो जानें पर प्रकाशित करेंगे.

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