ऐसे शब्दों को जोड़ीदार शब्द भी कहते हैं. पर शब्द जोड़ीदार कैसे बनते हैं?
सामान्यतः एक-दूसरे के पूरक होने के कारण उनका प्रयोग एक-साथ होता है. सुई के बिना धागे का कोई महत्त्व नहीं है और धागा न हो तो सुई किस काम की?
इसी तरह एक-दूसरे के पूरक होने के कारण कुछ विलोम शब्द भी जोड़ीदार शब्द बन गये हैं. जैसे कि दिन-रात और सुख-दुःख.
कुछ जोड़ीदार शब्द मानवीय या मानस पटल से जुड़े हुए है और एक साथ प्रसिद्द हुए हैं, जैसे राम-लक्ष्मण. सामान्यतः बड़ा या जिसके होने से ही दूसरा हुआ है वही पहले आता है. पर इसमें एक अपवाद, कृष्ण-बलराम. हालांकि बलराम कृष्ण से बड़े हैं, पर कृष्ण अधिक लोकप्रिय हुए, इसलिए उनका नाम पहले आता है.
तो, नीचे दिये शब्दों के जोड़ीदार शब्द खोजें क्या?
और इनका -
या फिर अगर हम यह पूछें कि आमतौर पर प्रचलित इनका बड़ा जोड़ीदार शब्द क्या है:
उत्तर के लिये नीचे स्क्रोल करें:
२) नल-नील, राहु-केतु, भरत-शत्रुघ्न, लव-कुश, राधा-कृष्ण
३) रामायण-महाभारत, संज्ञा-सर्वनाम, अकबर-बीरबल, सीता-राम
लेबल: जोड़ में बेजोड़, प्रश्नोत्तरी


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