रविवार, 5 सितंबर 2010

दो-सुखना या संबंध पहेली

विलक्षण प्रतिभा के धनी और अपने समय में सामाजिक सद्भाव बढ़ाने के लिए अमीर खुसरो (१२५३ - १३२५) ने एक नयी भाषा, नयी सोच को जन्म दिया। अपनी बात को सहजता से आम लोगों तक पहुँचाने के लिए खुसरो ने विभिन्न भाषाओँ से शब्द लिए और अनेक नयी विधाओं का भी आविष्कार किया। 'दो-सुखना' भी उन्हीं में से एक है।  

खुसरो ने 'सुखन' शब्द फारसी भाषा से लिया है। 
'सुखनका 
अर्थ है 'कथन' या ' वार्ता'। दो-सुखना का अर्थ है, दो कथनों में कही गयी एक ही बात  जिसका उत्तर एक ही है।

दो-सुखना में दो परस्पर अलग वस्तुओं के बारे में प्रश्न पूछा जाता है। उनके बीच का संबंध या, यूँ कहें तो, समानता का बिंदु ढूढ़ना पड़ता है। चलिए, एक संकेत देता हूँ। इन दो वस्तुओं के बीच का संबंध एक शब्द है जो क्रिया के रूप में प्रयुक्त होता है जो उन दो अलग-अलग वस्तुओं के बीच का संबंध दिखाता है। यही दो-सुखना का आधार है।    

दो-सुखना को, निस्बत को एवं फारसी से आये चिस्तान (वह कौन-सी चीज़ है, वह कौन है, वह क्या है, वह क्या है, वह कौन-सा, वह कौन-सी… पर आधारित प्रश्न) को, पारम्परिक परिभाषा के

आधार पर पहेली नहीं कह सकते हैं। मूलतः अमीर खुसरो की देन - दो-सुखना एवं निस्बत, और चिस्तान, प्रश्न पर आधारित बुझौवल हैं। अंग्रेजी में दो-सुखना का कोई समतुल्य riddle प्रश्न नहीं है। 

जो भी हो, इन प्रश्नों पर आप और हम माथापच्ची करते हैं, दिमागी कसरत करते-करवाते हैं और 

ठीक उसी तरह इन नयी प्रकार की पहेलियों का उत्तर खोजने का प्रयास करते हैं जैसे पहेली बूझने में। 

दो-सुखना से मनोरंजन होता है और ज्ञान-वर्द्धन भी - शब्द सम्पदा बढ़ती है और एक शब्द के विभिन्न अर्थों/प्रयोगों से परिचय होता है। इस तरह के पहेली प्रश्न समस्या को सुलझाने की क्षमता (problem solving aptitude) को विकसित करने में सहायक होते हैं। 

तो आइये, खुसरो द्वारा बनाई गई दो-सुखनों से मिलते हैं। दो-सुखना को लोकप्रिय बनाने के लिए
खुसरो द्वारा रचित दो-सुखना पहेलियाँ उत्तर सहित नीचे दी गई हैं: 

१) रोटी जली क्यों? घोडा अड़ा क्यों?
- 'फेरा' न था। रोटी को पलटा नहीं था और घोड़े को मोड़ा नहीं था।

२) समोसा क्यों न खाया? जूता क्यों न चढ़ाया?
- 'तला' न था। समोसे को तेल में तला नहीं था और जूते के नीचे वाला हिस्सा नहीं था। 

३) रोटी क्यों सूखी? बस्ती क्यों उजड़ी?
- 'खाई' न थी। रोटी बिना खाये रह गयी थी और बस्ती के चारों ओर सुरक्षा के लिये खाई नहीं थी। 

४) सितार क्यों न बजा? औरत क्यों न नहाई? 
- 'पर्दा' न था। सितार के डाँड पर धातु के मोटे तार या ताँत से बँधे रहते हैं जिन्हें पर्दा कहते हैं। इसके बिना सितार नहीं बज सकता। औरत के पास नहाने के लिये कपड़े का पर्दा या ओट नहीं था। खुसरो के समय औरतें पर्दा लगा कर नहाती थीं।

५) पानी क्यों न भरा? हार क्यों न पहना?
- 'घड़ा' न था। पानी रखने के लिये बर्तन नहीं था और हार तैयार नहीं हुआ था।  

६) घर क्यों अँधियारा? फकीर क्यों बिगड़ा?
- 'दिया' न था। घर में दीपक नहीं था और फकीर को कुछ भिक्षा (भीख) नहीं दी थी। 

७) राही प्यासा क्यों? गधा उदासा क्यों?
- 'लोटा' न था। राही (मुसाफिर) इसलिए प्यासा था क्योंकि उसके पास पानी पीने के लिये बर्तन (लोटा)
नहीं था। गधा इसलिए उदास था क्योंकि वह ज़मीन पर 'लोटा' नहीं था - उसने घास पर लोटपोट नहीं किया था

८) दीवार क्यों टूटी? राह क्यों लूटी?
- 'राज' न था। दीवार बनाने वाला राज मिस्त्री नहीं था. राज्य व्यवस्था नहीं होने के कारण राहों पर सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं था।  

९) घोड़ा क्यों अड़ा? पान क्यों सड़ा? 
- 'मोड़ा' न था। घोड़े को घुमाया-फिराया नहीं था और पान को पलटा नहीं था।

१०) जोगी क्यों भागा? ढोलकी क्यों न बजी? 
- 'मढ़ी' न थी। जोगी के रहने के लिए झोंपड़ी (मढ़ी) या कुटी न थी और ढोल पर चमड़ा नहीं चढ़ाया (मढ़ी) गया था।

११) गोश्त क्यों न खाया? डोम क्यों न गाया? 
- 'गला' न था। मांस ठीक से पका नहीं था - कच्चा था, गला नहीं था - इसलिए नहीं खाया। डोम के पास गाने के योग्य गला नहीं था।

१२) अनार क्यों न चखा? वज़ीर क्यों न रखा?
- 'दाना' न था। अनार के अंदर दाना नहीं निकला। वज़ीर इसलिए नहीं रखा क्योंकि कोई बुद्धिमान व्यक्ति नहीं मिला। 

१३) पोस्ती क्यों रोया? चौकीदार क्यों सोया? 
- 'अमल' न था. अफीम का नशा करने वाले पोस्ती के पास नशा करने के लिए अफीम नहीं था। चौकीदार इसलिए सोया क्योंकि उस समय उसके पहरे का समय नहीं था। 

१४) दही क्यों न जमा? नौकर क्यों न रखा? 
- 'जामिन' न था। दही जमाने के लिए जामिन नहीं था। नौकर के लिए कोई ज़मानत देने वाला नहीं था।       


१५) ब्राह्मण क्यों नहीं नहाया? धोबन क्यों पिटी?
- 'धोती' न थी। नहाकर पहनने के लिए धोती न थी, इसलिए ब्राह्मण नहीं नहा पाया। धोबिन कपड़ों को नहीं धोती थी।


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अच्छा लगा! तो अपने परिवार और मित्रों के बीच दो-सुखना संबंध पहेली को प्रसारित करें। और आप भी इस तरह के संबंध पहेली बना कर लिख भेजें। आपके नाम सहित इसे बूझो तो जानें पर मैं प्रकाशित करूँगा।  अपनी प्रतिक्रिया और पहेलियाँ इस पते  पर भेजें - bujhotojaaneATgmailDOTcom   


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यह पोस्ट ५ सितंम्बर २०१० में लिखे दो-सुखना पोस्ट का संशोधित एवं परिवर्द्धित संस्करण है जिसमें १३ अक्टूबर २०१५ को परिवर्तन किया गया है। 

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