मंगलवार, 31 मार्च 2015

वह कौन है - १ … माँ कसम, फ़िल्मी है! ...

इस बार फिल्मों पर आधारित कुछ प्रश्न लेकर आये हैं.

नीचे हिंदी फिल्मों के कुछ बहुत ही प्रसिद्द डायलॉग हैं जो अब आम बोलचाल की भाषा में आ गए हैं! 

ज़रा बूझो तो जानें …


वह कौन है … 

१) … जिसके पास माँ है?

२) … जो रिश्ते में तो आपका बाप है?

३) … जो सबके खून का प्यासा है?

४) … जिसे पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है?

५) … जिसके जैसी मूछें किसी की नहीं?

६) … जो अपने घर की बत्ती बुझाकर ही कुछ करने को कहता है?

७) … जो अपना नाम लेकर यह कहे कि वह खुश हुआ?

८) … जिसकी दोस्ती का एक उसूल है - नो सॉरी, नो थैंक यू?

९) … जिसको सिर्फ तारीख-ही-तारीख मिली?

१०) … जिसके बड़े शहर में छोटी बातें ही होती हैं?

११) … जिसका बैड लक ही ख़राब है?

१२) … जो टेंशन लेता नहीं सिर्फ देता है?

याद रहे, आपको अभिनेता, फिल्म और पूरा डायलॉग भी बताना पड़ेगा … 

माँ कसम, एकदम फ़िल्मी है!


उत्तर के लिए नीचे स्क्रॉल करें …


१) … शशि कपूर; दीवार (१९७५); 'मेरे पास माँ है,' शशि कपूर अमिताभ बच्चन के सवाल 'आज मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, पैसा है …तुम्हारे पास क्या है?' के जवाब में कहता है.

२) … अमिताभ बच्चन; शहंशाह (१९८८); ' रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते है, नाम है शहंशाह.'

३) … धर्मेन्द्र; यादों की बरात (१९७३); 'कुत्ते! कमीने! मैं तेरा खून पी जाऊँगा।'

४) …  अमिताभ बच्चन; डॉन (१९७८); 'डॉन का इंतज़ार तो ग्यारह मुल्कों की पुलिस कर रही है. लेकिन सोनिया, एक बात समझो, डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है.'

५) …नत्थुलाल (मुकरी): 'शराबी' (१९८४); 'मूछें हो तो नत्थूलाल जैसी हों … वरना न हों'



असली नत्थूलाल

६) … प्रेम चोपड़ा; सौतन (१९८३); 'जिनके घर शीशे के होते है वह बत्ती बुझा कर ही कपड़े बदलते हैं.'

७) … अमरीश पूरी; मिस्टर इंडिया (१९८७); 'मोगेम्बो खुश हुआ.'

८) … सलमान खान; मैंने प्यार किया (१९८९); 'दोस्ती का एक उसूल है - नो सॉरी, नो थैंक यू!'

९) … सनी दोएल; दामिनी (१९८३); 'तारीख पे तारीख मिलती रही, लेकिन इन्साफ नहीं मिलता. मिलती है तो सिर्फ तारीख!'

१०) … शाहरुख़ खान; दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (१९९५); 'बड़े-बड़े शहरों में ऐसी छोटी-छोटी बातें होती रहती हैं.'

११) … आमिर खान; रंगीला (१९९५); 'उसका तो न बैड लक ही ख़राब है.'

१२) .... संजय दत्त; मुन्नाभाई एम बी बी एस (२००३); 'टेंशन लेने का नहीं, सिर्फ देने का.'



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