गुरुवार, 23 सितंबर 2010

ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द

मेरे मित्र असद  क़िदवाई ने कॉलेज के दिनों में हमें बहुत शेर-शायरियां सुनाई थीं, कुछ नरम, कुछ गरम, कुछ उच्च फलसफा वाली, तो कुछ आम ज़िन्दगी की पेचीदगियों के बारे में. इन सबमें एक शेर मुझे आज भी याद है. मुझे यकीन है नूह नारवी (?) का यह शेर आपको अच्छा लगेगा -
 
कई गुज़रे सन, तेरा कम था सिन, लिए हम ने सुन तेरे घुंघरू
गया सीना छन, गया दिल भी छिन, यूँही बोले छुन तेरे घुंघरू

इस शेर का मतलब मैं नहीं बताऊंगा. हाँ बूझने के लिए दो शब्दों का अर्थ ज़रूर बता देता हूँ--सन - साल और सिन - उम्र.

इस शेर की विशेषता शब्दों की अद्भुत जाल में है - सन, सिन, सुन - और उनके rhyming words के प्रयोग से - छन, छिन, छुन. आशिक़ मिज़ाजी से भरा यह शेर अपने शब्द-जाल के कारण शायद आज भी जुबां पर है.

पर बूझो तो जानें में शेर. और शेर भी बूझने की ज़रूरत नहीं, तो फिर क्या? आज मेरा आपसे एक सवाल है. इस पोस्ट के टाइटल 'ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द' क्या क्या मतलब है?

चकरा गए! मैं भी पहली बार चकरा गया था. इतना भारी-भरकम शब्द, तो इसका मतलब भी वज़नदार होगा. अंग्रेजी में ऐसे शब्दों को Onomatopoeia कहते हैं. बूझ पाए क्या? शायद यह भी उतना ही भारी है! चलिए मैं बताता हूँ. आम बोलचाल की भाषा में कहें तो ध्वनि बताने वाले शब्द (Sound Words). पर क्या इनका इतना भारी-भरकम नाम ज़रूरी है.

मनुष्यों के मुंह से निकलने वाली विभिन्न प्रकार की ध्वनियों ने तो क्रमशः भाषा का रूप ले लिया है, परन्तु पशु-पक्षी जो बोलते हैं, उसका क्या?

हाथी भी तो चिंग्घारकर अपनी बात कहता है और कौवा कॉव-कॉव कर बोलता है. यहाँ तक की बिना प्राण वाली वस्तुएं भी कुछ विशेष प्रकार की ध्वनि निकालती हैं. चूड़ियाँ एक दूसरे से टकराने पर खनखनाती हैं और दांत भय या ठण्ड के कारण कटकटाते हैं. और ऊपर घुंघरू भी तो कुछ कह गयी. 

हाथी और कौवे की बोली को बताने वाला शब्द या फिर निर्जीव वस्तुओं से निकली हुई ध्वनि के सूचक शब्द ही ध्वनि शब्द हैं या फिर यूँ कहें तो ये ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द हैं. अधिकाँश भारतीय भाषाओँ में हमें इस तरह के ध्वनि-सूचक शब्द मिलते हैं.

क्या आपसे बिना सन लगाये, सिन गुज़ारे, मैं कुछ ध्वनि-सूचक शब्द पूछ सकता हूँ जिससे की हम सबका मन भी छन जाय, समय अगर छिन भी जाय तो कोई गम न हो और घुंघरू फिर छुन से बोले!

तो इन पशु-पक्षियों की क्या बोली है - गाय, भैंस, मेढक, बिल्ली, कुत्ता, घोड़ा, बकरी, मुर्गी, कोयल, पपीहा, बतख, हंस, गौरैया.

और इन बिना प्राण वाली वस्तुओं के sound words क्या हैं? - बादल, बिजली, हवा, पेड़ों के पत्ते, घड़ी, दिल, घंटा, सिक्कों की आवाज़. 

या फिर इन क्रियाओं के? दरवाज़े पर दस्तक देना, ऊँचा/तेज/निरंतर या बिना मतलब के बोले जाना, तेज़ हवा का बहना, किसी का ज़मीन पर गिर जाना, पर्वतीय क्षेत्र में पानी का बहना, पक्षी का उड़ जाना और उड़ते रहना
. है न यह मनोरंजक शब्द के भंडार की शुरुआत.

इस बार बूझो तो जानें नहीं, बल्कि खोजो और लिख भेजो...तो चलें, इस सूची में भारत की सब भाषाओँ से शब्द जोड़ें और ध्वनि-शब्दों का 'ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द' जितना भारी-भरकम भंडार बनायें...

एक संकेत दे दूँ - कुछ ध्वनि शब्द के अपने नाम हैं जैसे चिंग्घारना और कुछ तो उनकी बोली ही है, जैसे कॉव-कॉव या फिर धातु (metal) के बर्त्तन गिरने पर ठण-ठण की आवाज़ निकलना. कुछ ध्वनि-सूचक शब्दों के नाम भी हैं और उनके ध्वनि शब्द भी, जैसे भौरे की बोली को हम गुंजन भी कहते हैं और गुन-गुन भी. इन्हें जुड़वाँ शब्द भी कहते है. ('बूझो तो जानें' में जुड़वाँ शब्द के लिये यहाँ देखें)

इस खोज में मज़ा और भी आएगा जब भारतीय भाषा के ध्वनि शब्द के अंग्रेजी equivalent भी साथ में लिख भेजें, खासकर, निर्जीव वस्तुओं के ध्वनि शब्द...
 
लिख भेजो तो जानें...

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