रविवार, 12 दिसंबर 2010

गोपू की सरल पहेलियाँ

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ शहर में रहने वाला गोपू तो ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है, पर है बहुत बुद्धिमान। वह कवि भी है। उसे नित्य नयी पहेलियाँ बनाने का शौक है।  संजय रावत ने इसी गोपू की कहानी पहेली बूझो और बनाओ में  लिखी है. 

मोहल्ले के कुछ बच्चे अपने गोपू दादा के पास पहेली बूझने आते हैं। गोपू का पहेली का उत्तर खोजने का तरीका इतना सरल एवं अच्छा था कि बच्चे उत्सुक होकर पहेलियों के बार में जानना चाहते हैं ... पहेलियाँ आई कहाँ से, पहेलियों के भेद, पहेली बनाने वाले कौन थे और पहेली बनती कैसे है? न सिर्फ इन सब प्रश्नों का उत्तर इस पुस्तक में है, पर उससे भी अधिक! पहेली बूझो और बनाओ की विशेषता यह है कि इसमें गोपू ने बहुत ही रोचक ढंग से पहेली बनाने का तरीका भी बताया है। पहेली के शौकियों, अभिभावकों और अध्यापकों को यह पुस्तक ज़रूर देखनी चाहिए।  
आज हम आपके लिये गोपू की कुछ नयी पहेलियाँ लेकर आये हैं. ज़रा बूझो तो जानें...

१) बैठ नाक पर ले अंगाड़ई, कानों पर है टांग फंसाई
    इसने आकर नज़र बढाई, हो गयी लो आसान पढाई
२) धीरे से चलकर यह है आती
    खिल-खिलाकर हंसी बनाती
    न है नाक पर और न कान
    होंठो पर है उसकी पहचान
३) सीटी इसकी घर-घर बाजे
    खाना पके पल भर लागे
    मिलता सबको चावल-दाल
    बूझो गोपू का यह सवाल
४) दूर-दूर ले जाए सवारी और कहीं ढोये माल
    एक माँ के पीछे गाड़ी देखो मिलाकर चलते ताल
५) चौंसठ खानों का एक मैदान, बच्चे-बूढ़े सबका रुझान 
    विश्व को भारत का यह दान, कहे गोपू भी सीना तान
६) खेल यह भैया बड़ा अनोखा, दूजे की हद में दो उसे धोखा
    ताल ठोंका, सांस रोका, छू वापस दौड़ा, छोड़ा न मौका
७) भारत में यह पूजी जाती
    दूध हमें यही पिलाती
    कहते सब इसको माता
   गोबर भी है काम में आता
८) हर अंग इसका काम में आता
    हरियाली है जीवन में लाता
    इसके रहते बढ़ती आक्सीजन
    काटो इसे, लुप्त हो जीवन
९) कभी एकल कभी जुगल है, खेल कभी यह मिक्स्ड डबल है
   कभी विम्बलडन तो फ्रेंच ओपन, पेस-सानिया का यही रोमांच है
१०) हरि का द्वार खुले यहाँ, मिले गंगा की निर्मल धारा 
     मनसा पूरी करती देवी, दिखे साधू-संतों का नज़ारा 
   
उत्तर के लिए नीचे स्क्रोल करें:
१) ऐनक / चश्मा
२) मुस्कान
३) प्रेशर-कुकर
४) रेलगाड़ी
५) शतरंज
६) कबड्डी
७) गाय
८) पेड़-पौधे
९) टेनिस
१०) हरिद्वार

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