शनिवार, 11 मई 2024

क्या पहेली आपकी जीवन बीमा (life insurance) बन सकती है?

क्या पहेली आपकी जीवन बीमा (life insurance) बन सकती है?


यह पढ़कर आप भौचक्के तो नहीं हो गए? मैंने सचमुच आपसे यह पूछा है कि क्या पहेली आपके लिए जीवन बीमा या life insurance का काम कर सकती है?

इस पहेली प्रश्न का उत्तर है - हाँ!

अब आप पूछेंगे वह कैसे? मैं बताता हूँ। 

पहेली बूझना-बुझाना, पहेलियों द्वारा दिमाग़ी कसरत करना किसीके लिए भी insurance का काम कर सकता है। विशेषकर बच्चों और किशोरों के लिए और उन परीक्षार्थियों के लिए जो छात्रवृति (scholarship) की परीक्षा की तैयारी कर रहें हैं; अथवा किसी भी उच्च शिक्षा संस्थान में प्रवेश के लिए  प्रतियोगिता परीक्षाओं (competitive entrance test) की तैयारी; अथवा किसी भी तरह की सरकारी नौकरी के लिए प्रतियोगिता परीक्षाएँ (competitive exams  for government jobs) की तैयारी; या फिर प्राइवेट नौकरियों के लिए तैयारी।

आप पूछेंगे कि इन प्रतियोगी परीक्षाओं और पहेली में क्या संबंध है? किसी भी कम्पेटिटिव इग्ज़ैम और पहेली में गहरा और परिपूरक संबंध है। लैला-मजनू, सीरी-फ़रहाद, रोमीओ-जूलीएट की तरह ही परीक्षा और पहेली का संबंध है!

चकरा गए। मैं आपसे कुछ और सवाल पूछता हूँ। पहेली क्या करती है? पहेली का मुख्य उद्देश्य क्या है? चलिए मैं आपको multiple choice question (MCQ) की भाँति कुछ विकल्प देता हूँ:

क) पहेली मनोरंजन और टाइमपास का साधन है।
ख) पहेली छकने-छकाने के काम आता है।
ग) पहेली से हमारी दिमाग़ी कसरत होती है क्योंकि पहेली में पूछे गए प्रश्न का उत्तर ढूँढने के लिए हमें सोचना पड़ता है।
घ) तीनों विकल्प सही हैं।

आपको क्या लगता है? मुझे तो अंतिम  विकल्प (घ) ही सही लग रहा है।

पहेली से जो टाइमपास और बच्चे-बड़े सबका मनोरंजन होता है उससे पहेली में छिपे गूढ़ तत्त्व को हम भूल जाते हैं। पहेली की विशेषता क्या है? पहेलियाँ हमें बिना बताए हर हमको सोचने के लिए विवश करती हैं। कोई भी व्यक्ति बिना सोचे-समझे-जाने पहेली का उत्तर नहीं दे सकता है। बिना दिमाग़ी घोड़े दौड़ाए उत्तर ढूँढ पाना थोड़ा कठिन होता है।

पहेली हमारे सामान्य ज्ञान, भाषा और संस्कृति का ज्ञान, शब्द ज्ञान, अपने आसपास के परिवेश का ज्ञान, अपनी अवलोकन शक्ति (observation capability) एवं सबसे महत्वपूर्ण बात - हमारी समस्या को सुलझाने की क्षमता (problem solving capability) को परखता है। साथ ही, पहेली हमें विभिन्न संभावित दिशाओं में सोचने  लिए मजबूर करता है। पहेली हमारी चिंतन क्षमता में दक्षता लाती है एवं विभिन्न प्रकार की पहेलियाँ हमारे general mental ability को बढ़ाने में सहायक होती है।

हर प्रतियोगिता परीक्षा का उद्देश्य भी यह है कि वह ऐसे परीक्षार्थियों का चयन करे जिनमें समस्या को सुलझाने की क्षमता हो और जो अपने आसपास के परिवेश के हर पहलू से परिचित हो।

पहेली बूझने-बुझाने और पहेली बनाने से हमारा बौधिक विकास होता है। पहेली में निहित प्रश्न को समझना हमारे comprehension capability को बढ़ाती है। साथ ही हमारी तार्किक सोच (logical reasoning) और analytical ability भी बढ़ती है।

अन्य लोगों से पहेलियों के उत्तर बूझने-बुझाने के खेल में अनायास ही हमारा interpersonal और communication skill का भी विकास होता है।

चाहे पारम्परिक चार पंक्तियों वाली नयी-पुरानी कवितामयी पहेली हों अथवा शब्दों पर आधारित पहेली प्रश्न (खुसरो की निस्बतें और दो-सुखना और उनके नवीन रूप; खुसरो और भारतेन्दु की कह-मुकरियाँ; चिस्तान) हों अथवा शब्द-जाल हों अथवा गणित की पहेलियाँ हों - ये सभीं हमें उत्तर सोचने के लिए प्रेरित करती हैं। और इस तरह बिना हमें बताए हमें बौद्धिकता देती हैं और हमें आने वाले जीवन के लिए तैयार करती हैं।

यह तो है पहेली और परीक्षा में सफलता और तैयारी का संबंध! पर इससे आपका या आपके आसपास के बच्चों-किशोरों या आपके छात्रों का जीवन बीमा कैसे होगा? जैसे बीमा द्वारा अपने जीवन को सुरक्षित रखने के आप  नियमपूर्वक अपनी पॉलिसी में निवेश करते हैं और जैसे जितनी कम उम्र में आप अपना जीवन बीमा करवाकर उससे अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं, ठीक उसी तरह हर प्रकार की पहेली एवं क्विज़ इत्यादि के सवाल के उत्तर जितनी कम उम्र से और जितनी अधिक मात्रा में निरंतर बूझते-सुलझाते रहें उतना ही आप अपने भविष्य को सुदृढ़ और सुनिश्चित कर पाएँगे।

तो अब आप कहें कि पहेली आपके लिए जीवन बीमा बन सकती है या नहीं?

क्या आप पहेली और जीवन बीमा के इस संबंध से सहमत हैं? अपनी प्रतिक्रिया अवश्य भेजें। हमारा ईमेल है bujhotojaaneATgmailDOTcom


- प्रणव कुमार सिंह, नॉएडा 


रविवार, 25 जून 2017

राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी की बाल कविता "क्यों?"

क्यों?

सोहनलाल द्विवेदी


(राष्ट्रकवि सोहनलाल द्विवेदी का चित्र www.ajabgajab.com के सौजन्य से)
सोहनलाल द्विवेदी (४ मार्च १९०६ - १ मार्च १९८८) ने हिन्दी साहित्य में राष्ट्रीय चेतना के गायक कवि के रूप में इतनी ख्याति पाई कि उन्हें 'राष्ट्रकवि' के रूप में जाना जाने लगा। इसके साथ ही वे बालकाव्य के अप्रतिम रचनाकार भी हैं।

'वंदना के इन स्वरों में, एक स्वर मेरा मिला लो' पूजा गीत, से 'भारतवर्ष', 'युगावतार गाँधी', 'राणा प्रताप के प्रति', 'बढ़े चलो! बढ़े चलो!', 'सुना रहा हूँ तुम्हें भैरवी' इत्यादि न जाने उनकी कितनी कविताएँ आज भी पाठकों के मन में वही भावनाएँ जागृत करती हैं, जिस भाव का संचार शायद प्रथम प्रकाशन के समय हुआ होगा।


परन्तु, द्विवेदी जी ने अपनी कवि-यात्रा का आरम्भ बालगीतों से किया था। उनकी प्रथम बाल कविता 'बिलैया' शिशु पत्रिका के जून १९२९ अंक में छपी थी। तब से अपने जीवन के अंतिम दिनों तक उन्होंने सैकड़ों कविताएँ लिखीं जो
अधिकांशतः उनकी १९ कृतियों एवं २४ बालगीत-संग्रहों में प्रकाशित हुई हैं।


आज हम बाल-सखा  पत्रिका के वर्ष - २३; अंक - ८ (अगस्त १९३९; श्रावण १९९६) में प्रथम प्रकशित उनकी कविता 'क्यों?' को आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

'क्यों?' कविता में बच्चों के मन में आने वाले प्रश्न, उनकी नैसर्गिक कुतूहल और बालपन की सादगी का समावेश है। द्विवेदी जी ने इन्हें प्रश्नों का रूप देकर ग्यारह प्रश्न-पहेलियाँ तैयार की हैं, जिनका उत्तर इन कविताओं में है भी और नहीं भी! बाल्य काल के इन मनोभावों की गुत्थी का सही उत्तर कौन दे पायेगा? द्विवेदी जी के शब्दों में कहें तो, "सुलझाये यह कौन पहेली?"

यह पहली बार हो रहा है कि बूझो तो जानें हम कविता उद्धृत कर रहे हैं? सोहनलाल द्विवेदी जी की यह बालकविता 'क्यों?' बूझो तो जानें पर नई-पुरानी पहेलियों के संचयन का जो प्रयास हम कर रहे हैं, उसे संवर्धित करने में एक महत्त्वपूर्ण कड़ी है। आशा है कि पहेली-प्रेमियों, कविता-प्रेमियों और अभिभावकों को 'क्यों?' उतनी ही अच्छी लगेगी, जितना हमें इसे ढूँढ़ने में मिली है।

आइये, इस भूली-बिसरी कविता का आनन्द लेते हैं . . .


।। १ ।।  
क्यों बच्चों को नहीं सुहाता,
पढ़ना-लिखना, शाला जाना?
खेल-कूद में मन लगता,
दिन भर घर में धूम मचाना?
क्यों भाती मन को रंगरेली?
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। २ ।।
क्यों पतंग उड़ती है ऊपर?
क्यों न कभी नीचे को आती?
और गेंद फेंको जो ऊपर,
तो वह फौरन नीचे आती,
चोट लगाते ठेला-ठेली,
सुलझाये यह कौन पहेली?

 ।। ३ ।।
क्यों मेंढक पानी में रहते?
टर्रटों-टर्रटों गाना गाते,
क्यों न घोंसले में चढ़कर के
वे चिड़ियों को मार भागते?
जल में ही करते अठखेली,
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। ४ ।।
क्यों कोल्हू जब बैल चलाता,
उसकी आँख बन्द की जाती?
तिल में से न कढ़ता है,
कितनी ही वह पेरी जाती,
कब मन में खुश होता तेली?
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। ५ ।।
क्यों स्याही होती है काली?
क्यों काला कागज न दिखाता
रंग-बिरंगी तस्वीरें लाख,
हरा-भरा मन है बन जाता,
क्यों भाते हैं सखा-सहेली?
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। ६ ।।
नहीं मदरसे अच्छे लगते,
भाता है छुट्टी का घण्टा।
मजा न चुप रहने में मिलता,
मजा तभी जब बजता टंटा।
अच्छी लगती ठेलमठेली।
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। ७ ।।
चाचाजी क्यों दाढ़ी रखते,
बच्चों के मूँछें न दिखतीं?
क्यों चची कंघी करती है,
अम्माँ अंजन रोज लगाती?
गुरु को भाते चेला-चेली,
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। ८ ।।
क्यों चींटी बिल में रहती है,
क्यों इनको है शक्कर भाती,
पानी में शक्कर डालो तो,
पल भर में वह घुल-मिल जाती,
चींटी को भाती गुड़ भेली,
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। ९ ।।
क्यों नटखट बच्चों को भाता
सदा पहेली को सुलझाना,
क्यों नानी को अच्छा लगता,
बच्चों के मन को उलझाना,
क्यों भाती है कथा-नवेली,
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। १० ।।
 सम्पादक जी को क्यों भाता,
बच्चों के मन को छलना?
क्यों बच्चों को अच्छा लगता,
सम्पादक का मन फुसलाना,
छिड़ती छेड़छाड़ अलबेली,
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। ११ ।।
क्यों मुझको अच्छा लगता है,
नई-नई नित कविता गढ़ना?
क्यों तुमको अच्छा लगता है,
नई-नई नित कविता पढ़ना?
क्यों भाता है फूल चमेली,
सुलझाये यह कौन पहेली?

।। इति ।।


यदि आपको ऐसी ही कविताओं की जानकारी हो, या ऐसी ही कविता आपने भी लिखी हों, तो हमें bujhotojaane@gmail.com पर लिख भेजें। उन्हें आपके नाम से प्रकाशित कर हमें बहुत आनन्द होगा। 


   

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मंगलवार, 20 जून 2017

गोपू की कुछ और भी सरल पहेलियाँ

गोपू भैया की बच्चों के लिए सरल पहेलियों का आनन्द तो आपने पहले भी उठाया है। 

यदि आप गोपू से पहली बार मिल रहे हैं, तो उसके बारे में यहाँ पढ़िए। वैसे कह दूँ, गोपू आपके-मेरी तरह पहेलियों का शौकीन है। फर्क केवल इतना है कि गोपू पहेलियाँ भी बनाता है।    

फिर से एक बार गोपू आपके लिए पहेलियाँ लेकर आया है। इस बार गोपू ने आपके दिमागी कसरत के लिए तरह-तरह की सरल पहेलियाँ बनायी है। इनका उत्तर भी यहीं है, पर इन पहेलियों का उत्तर ताकने से पहले, उन्हें बूझो तो जानें  . . .     


। १ ।। 
ब्रह्मा का है वास यहाँ पर
लगता ऊँटों का मेला 
राजस्थान की एक धरोहर
धोता पाप हैयहाँ सरोवर 

। २ 
दिल्ली शहर में कमल खिला है
सब लोगों के लिए खुला है
बहाई धर्म की यह पहचान
बूझो इस मंदिर का नाम

। ३ 
शेयर बाजार और फिल्म-सिनेमा
चौपटी का क्या कहना
गेटवे यहाँ इंडिया का होता
कहते शहर यह कभी  सोता

। ४ 
देख प्यार की अमिट निशानी
दुनिया भर ने लोहा है मानी
भारत में है यह एक अजूबा
 गए अगर तो मौक़ा चूका

। ५ 
गंगा का है घाट यहाँ परहै मशहूर यहाँ की साड़ी भी
खाईके पान यहाँ का बाबूचंचल बने अनाड़ी भी

। ६ 
तीन नदियों का संगम यहाँ
पावन यहाँ की माटी है
जीते जी अमरूद खिलाती 
मरे तोमोक्ष दिलाती है

। ७ 
दो पंक्ति में साथ खड़ी है
पास-पास पर दूर बड़ी है 
कभी  मिलते इनके छोर
पर रेल है छाती छुक-छुक दौड़

। ८ 
बालों से है इसका नाता
उलझे बाल यही सुलझता
गंजों के यह काम  आता
ज्ञानी वही जो नाम बताता

। ९ 
इसका  कोई तोड़ कोई मेल
 ये चाट है ही भेल
बैठ कम्प्यूटर पर लिखो फटाफट
संदेश भेजना अब पल भर का खेल 

। १० 
जोड़-घाटव और गुना-भाग 
 कोई इससा विद्वान
गणित तुम्हें जो  आए बच्चों
तो यह यंत्र बने वरदान



उत्तर के लिए नीचे स्क्रोल करें . . . 

। १ ।। पुष्कर
। २  लोट्स टेम्पल
। ३ । मुंबई
। ४ । ताजमहल
। ५ । बनारस
। ६ । इलाहाबाद
। ७ । रेल की पटरियाँ
। ८ । कंघा/कंघी
। ९ । -मेल
। १० । कैलकुलेटर

तो कहिये, कैसा लगा! यदि आपको भी सरल पहेलियाँ हों अथवा कठिन, यदि बुझवाने का शौक है तो ऐसी पहेलियाँ उत्तर सहित हमें bujhotojaane@gmail.com पर लिख भेजें। हम उसे आपके नाम सहित उसे सहर्ष यहाँ प्रकाशित करेंगे।

टीम - बूझो तो जानें      


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मंगलवार, 27 दिसंबर 2016

माथापच्ची - २: मेनसा क्विज

यहाँ हम मेनसा के वेबसाइट https://www.mensa.org पर दिए मेनसा वर्कआउट (Mensa Workout) के तीस सवालों में से गणित और तर्क पर आधारित कुछ सवाल हिन्दी में प्रस्तुत कर रहे हैं।

यह आपके IQ का आकलन तो नहीं करेगा, पर इससे आपको मेनसा द्वारा IQ test में पूछे जाने वाले सवालों का अंदाज हो जाएगा। आपको यदि दिमागी कसरत करने का शौक है तो इन पहेलियों के अंत में दिए लिंक को जरूर देखिएगा।

और, यदि आपको अपना IQ जानने की इच्छा न हो या पहेली बूझने-बुझाने का शौक न भी हो और आप किसी दाखिले (entrance test) की तैयारी कर रहे हैं या फिर नौकरी के लिए किसी प्रतियोगिता परीक्षा (competitive exam) की तैयारी कर रहे हैं, तो आप मेनसा वर्कआउट के इन सवालों से या फिर www.bujhotojaane.in पर इस तरह की गणित पहेलियाँ, सरल पहेलियाँ, तर्क के प्रश्न इत्यादि से प्रैक्टिस कर सकते हैं। इस तरह के प्रश्न और पहेलियाँ बूझने से आप अपनी सोचने की शक्ति में पैनापन ला सकते हैं। परीक्षार्थियों को किसी भी परीक्षा में अव्वल आने का यह एक सरल तरीका है।

www.bujhotojaane.in पर आपको सभी पहेलियाँ उत्तर सहित मिलेंगी, साथ में उत्तर तक पहुँचने का तर्क भी व्याख्या के साथ (solutions with explanations) मिलेंगी।

पर अभी मेनसा वर्कआउट के सवालों को बूझो तो जानें . . .

१) निम्नलिखित वस्तुओं में से कौन-सा वस्तु अन्य वस्तुओं से सबसे कम समानता रखता है:

          कविता
          उपन्यास
          चित्र
          मूर्ति
          फूल


२) वह कौन-सी संख्या है जो ४०० के दसवें भाग की चौथाई भाग का आधा है?

         २
         ५
         ८
         १०
         ४०

३) यदि वृत्त (circle) एक है तो अष्टकोण (octagon) कितने हैं?

         २
         ४
         ६
         ८
         १२

४) १ से १०० तक की गिनती में कितने ७ मिलेंगे?

         १०
         ११
         १९
         २०
         २१

५) चार साल पहले निहारिका की उम्र ध्रुव से दुगुनी थी। आज से चार साल बाद, ध्रुव की उम्र निहारिका की उम्र की तीन-चौथाई (३/४) होगी। आज निहारिका की उम्र क्या है?

६) यदि दो टाइपिस्ट दो मिनट में दो पन्ने टाइप करते हैं, तो छह मिनट में अट्ठारह पन्ने टाइप करने के लिये कितने टाइपिस्ट लगेंगे?

        ३
        ४
        ६
        १२
        ३६


उत्तर के लिए नीचे स्क्रोल करें . . .



१) फूल। फूल प्रकृति से मिलती है, जबकि अन्य सबका निर्माण मनुष्य करता है। (इस प्रश्न का वर्गीकरण Analogy और Odd One Out दोनों में हो सकता है)।

२) पाँच (५)। ४०० का दसवाँ भाग ४० है; इसका चौथा भाग १० है; और १० का आधा ५ होता है।

३) आठ।

४) बीस (२०)। ७, १७, २७, ३७, ४७, ५७, ६७, ७०, ७१, ७२, ७३, ७४, ७५, ७६, ७७, ७८, ७९, ८७, और ९७। सामान्यतः ७७ के दो ७ तो हम गिनना भूल जाते हैं।

५) बारह (१२)। चार साल पहले निहारिका आठ साल की थी और ध्रुव चार का था। आज से चार साल बाद निहारिका सोलह की होगी और ध्रुव बारह का।

६) छह (६)। एक टाइपिस्ट दो मिनट में एक पन्ना टाइप करता है। छह मिनट में वह तीन पन्ने टाइप करेगा, तो अट्ठारह पन्ने टाइप करने के लिये छह टाइपिस्ट लगेंगे।


***

अच्छा लगा। आप https://www.mensa.org/workout पर मेनसा वर्कआउट के बाकी सवाल अंग्रेजी में देख सकते हैं।


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मंगलवार, 20 दिसंबर 2016

माथापच्ची - १: गणित और तर्क के कुछ कठिन, कुछ सरल पहेलियाँ

यहाँ पर गणित और तर्क के कुछ कठिन प्रश्न, कुछ सरल पहेलियाँ दी गयी हैं।इन पहेलियों का उत्तर इस पोस्ट के अंत में हैं। साथ में इन पहेलियों के हल का तर्क व्याख्या के साथ (questions with solutions and explanations) दिया गया है।

पर स्क्रोलकर उत्तर देखने से पहले स्वयं इसका हल ढूँढ़ने का प्रयास जरूर कीजिएगा। इस दिमागी कसरत का आनन्द कुछ और ही है।

गणित और तर्क की कुछ कठिन, कुछ सरल पहेलियाँ को बूझो तो जानें . . .

१) यदि मेज पर एक दर्जन आम हैं और उसमें से आप सात ले लेते हैं, तो आपके पास कितने आम हैं?

२) एक हवाई जहाज मुम्बई से दिल्ली की दूरी १ घण्टे ५० मिनट में तय करती है, पर वही विमान लौटते समय ११० मिनट लेती है। ऐसा क्यों?

३) एक पोल्ट्री फार्म के मालिक को एक दिन १००० अंडे का ऑर्डर मिला। उसके यहाँ ३०० मुर्गे थे। उनमें से १०० मुर्गे हर दिन पाँच अंडे देते थे; १०० मुर्गे सात और बाकी १०० अंडे नहीं देते थे। ऑर्डर पूरा करने के लिये उसे कितने मुर्गों के पास जाना पड़ेगा?

४) एक गाड़ी में दो माताएँ, दो बेटियाँ, एक नानी और एक नतनी बैठे हैं। उस गाड़ी में कुल कितने लोग हैं?

५) आप १०० में से २ कितनी बार ले सकते हैं?

६) यदि आज सोमवार है, तो ६१ दिन बाद सप्ताह का कौन-सा दिन पड़ेगा?

७) एक पिता और पुत्र की उम्र को यदि हम जोड़े तो उसका योग ६६ आता है। मजे की बात तो यह है कि बेटे की उम्र पिता की उम्र की संख्या को उलटकर लिखने से जो संख्या बनती है, वह है। उन दोनों की उम्र क्या है?


उत्तर के लिए नीचे स्क्रोल करें:


१) सात। क्योंकि आप ही ने तो सात आम ले लिये हैं।
२) दोनों एक ही है; १ घण्टा ५० मिनट = ११० (१ घण्टा = ६० मिनट; ६० + ५० मिनट = ११०मिनट)
३) एक भी नहीं। क्या मुर्गे कभी अंडा देते हैं!
४) तीन। नानी, उनकी बेटी और उनकी बेटी। नानी अपनी बेटी की माँ है; उसकी बेटी अपनी बेटी की माँ है - दो माताएँ; दो बेटियाँ; एक नानी और एक नतनी।
५) सिर्फ एक बार। एक बार २ लेने से संख्या १०० नहीं बचती है, घटकर ९८ हो जाती है।
६) शनिवार। एक सप्ताह में सात दिन होते हैं। सप्ताह का कोई भी दिन सात दिन बाद फिर आता है। ६३ दिन बाद सोमवार आएगा। उससे दो दिन पहले, ६१वाँ दिन, शनिवार होगा।
७) इस प्रश्न के तीन सम्भावित उत्तर हैं। पिता-पुत्र की उम्र ६० और ०६; ५१ और १५ एवं ४२ और २४ हो सकती है। पिता के उम्र की संख्या को उलटकर लिखने पुत्र की आयु भी मिल जाती है और इन तीनों अंक समूह का जोड़ ६६ है।

***

आपको गणित की पहेलियाँ और तर्क पर आधारित यह प्रश्न-गुच्छ कठिन लगे याआसान, बताइएगा जरूर।

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