गुरुवार, 8 सितंबर 2016

विविधा: प्रेमचंद द्वारा अंग्रेजी शब्दों के हिंदी पर्याय

आज जब हिंग्लिश (Hinglish) का प्रयोग बढ़ रहा है, अंग्रेजी के शब्द अपने मूल रूप में बोलचाल की हिंदी में द्रुत गति से प्रवेश पा रहें हैं, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया हर भाषा के व्याकरण और वर्तनी में उथल-पुथल मचा रहे हैं, तब यह समझना ज़रूरी है कि इस बदलाव के बारे में क्या करना चाहिए।

क्या यह बदलाव एकतरफा है? क्या हम सिर्फ अंग्रेजी से शब्द ले रहे हैं या फिर अंग्रेजी को भी हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओँ से शब्द दे रहे हैं? क्या हिंदी अब केवल बोलचाल की भाषा रह गई है? क्या हिंग्लिश लिखते समय देवनागरी लिपि का प्रयोग क्रमशः कम हो रहा है एवं लिखित हिंदी की लिपि भी अंग्रेजी में प्रयुक्त रोमन लिपि हो गयी है? क्या ऐसी स्तिथि में कुछ किया जा सकता है?

यदि हिंदी अथवा हिंग्लिश में देवनागरी/रोमन लिपि के प्रयोग के प्रश्न को कुछ समय के लिए भूल जाएँ तो भाषा और शब्दों के इस्तेमाल की यह समस्या कोई नई नहीं है। बदलाव ही समय का नियम है। भाषा भी परिवर्तनशील है। ज़रूरी यह है कि हम इस परिवर्तन को कैसे देखते हैं और इसके बारे में क्या करते हैं? क्या हम इसे जैसा हो रहा है उसे वैसा ही स्वीकारते हैं या फिर अपनी ओर से इसे रोकने/बढ़ाने में कुछ योगदान करना चाहते हैं?

उदाहरण के लिए, क्या हम हिंदी में अनुपलब्ध शब्दों के लिए नए शब्द बनाते हैं, जैसे कि प्रेमचंद ने अपने उपन्यास 'कायाकल्प' में golden dreams को स्वर्ण-स्वप्न किया था। या फिर ऊपर जैसे मैंने स्मार्टफोन एवं सोशल मीडिया को उनके मूल रूप में देवनागरी लिपि में लिखा है, उसी तरह golden dreams को मूल अंग्रेजी से लेकर देवनागरी में रूपांतरित मात्र (गोल्डन ड्रीम्स) कर देते हैं।

यह भाषिक आदान-प्रदान हर युग की विडंबना है। ऐसी स्तिथि में क्या करना चाहिए?

इस प्रश्न का कोई एक अथवा सही उत्तर नहीं है। हो भी नहीं सकता। होना भी नहीं चाहिए। हर व्यक्ति अपने हिसाब से इसे देखता है और अपना मार्ग पकड़ता है। आइए देखते हैं कि कलम के सिपाही, कालजयी साहित्यकार प्रेमचंद ने ऐसी स्थिति में क्या किया।

प्रेमचंद का कथा-शिल्प और रचना संसार अतुलनीय है। उनकी भाषा-संस्कार ने हिंदी साहित्य में नए प्रतिमान स्थापित किए। इनमें से एक है, उनके द्वारा शब्दों का प्रयोग। प्रेमचंद ने हिंदी, अरबी-फारसी-उर्दू, संस्कृत,   देशज, लोकभाषा और अंग्रेजी के शब्दों का अपनी रचनाओं में भरपूर प्रयोग किया। प्रेमचंद ने इन भाषाओँ के शब्दों का यथावत एवं परिवर्तित रूप में प्रयोग किया तथा बहुत से नए संकर शब्द हिंदी को दिए। उन्होंने बहुत से अंग्रेजी शब्दों के हिंदी पर्याय का भी अपनी रचनाओं के माध्यम से हमें दिए हैं। आज ऐसे कुछ शब्द आपके सामने रख रहे हैं। आपको उनका सही अंगेज़ी शब्द बताना है। ज़रा बूझो तो जानें ...


१) पैरगाड़ी  
२) खुला हुआ भेद  
३) छात्रालय  
४) पत्र-कागज़  
५) प्रसंशा-पत्र  
६) थापी  
७) राजपत्र  
८) ऊष्णतामापक यन्त्र  
९) छोटी हाज़री 
१०) मुलाकाती-कार्ड   

ऊपर जो प्रश्न उठाये गए है, यह एक छोटा-सी बात, पर है सोचने वाली। उन पर विचार भी ज़रूर कीजियेगा।

उत्तर के लिए नीचे स्क्रोल करें:

१) पैरगाड़ी : साइकिल (cycle) 
२) खुला हुआ भेद : ओपन सीक्रेट (open secret) 
३) छात्रालय : हॉस्टल (hostel)
४) पत्र-कागज़ : लेटर-पेपर (letter paper)
५) प्रसंशा-पत्र : टेस्टीमोनियल (testimonial)
६) थापी : क्रिकेट-बैट (cricket-bat) 
७) राजपत्र : गैज़ेट (gazette)
८) ऊष्णतामापक यन्त्र : थर्मामीटर (thermometer) 
९) छोटी हाज़री ; ब्रेकफास्ट (breakfast)
१०) मुलाकाती-कार्ड : विजिटिंग कार्ड (visiting card)


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