शुक्रवार, 2 जनवरी 2015

कह-मुकरी - २



कह-मुकरी - २ 

कह-मुकरी की व्याख्या कुछ इस प्रकार है - कह-मुकरी का अर्थ है कुछ कहकर उससे मुकर जाना। 

अमीर खुसरो द्वारा प्रणीत कह-मुकरी मूलतः दो सखियों के बीच संवाद है. पारम्परिक छंदों की तरह, पहले तीन पदों में एक सखी अपने प्रियतम (साजन) को याद करती जान पड़ती है. जब चौथे पद में उसकी सखी उसके कथनों से 'साजन' अभिप्राय लगाती है, तब पहली सखी अपनी बात से मुकर जाती है और पहले तीन पदों में कही अपनी बातों का कुछ और ही अर्थ बताती है. वह बहुत चालाकी से किसी और सामान्य वस्तु की ओर इशारा कर देती है. 

आज, बूझो तो जानें आपके लिए अमीर खुसरो की कुछ कह-मुकरियाँ लेकर आया है. 


१)
आप हिले अरु मोहे हिलावे, वाका हिलना मोरे मन भावे
हिल-हिलाके होए निसंखा 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, पंखा'।


Āp hile aru mohe hilāve, Vākā hilnā more man bhāve,
Hil-hilāke hoë nisaṅkhā. 'E, sakhī, sājan,?' 'Nā, sakhī, paṅkhā'.

२)
बात चलत मेरो अचरा गहे, मेरी सुने, ना अपनी कहे
ना कुछ मो सुन झगड़ा झांटा 'क्यों सखि, साजन?' 'ना, सखि, काँटा'।

Bāṭ chalat mero achrā gahe, Merī sune, na apnī kahe,
Nā kuchh mo sūṅ jhagṛā jhāṅṭā: 'Kyoṅ sakhī, sajjan?' 'Nā, sakhī, kāṅṭā.'

३)
पी अपनो बस में है नहिन, जो मैं कहत करत है नहिन
होंठ नहिन अपनों करे लाख जतन 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, मन'।

Pī apno bas meṅ hai nāheṅ, jo maiṅ kahat karat hai nāheṅ,
Hot nāhīṅ apno kare lākh jatan, 'E, sakhī, sājan?' 'Nā, sakhī, man.'

४)
लौंडी भेज उसे मंगवाया,  नंगी होकर मैं लगवाया
हम से उस से हो गया मेल 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, तेल'।

Lauṅḍī bhej use maṅgvāyā, Naṅgī ho-kar maiṅ lagvāyā,
Ham se us se ho gayā mel: 'E sakhī, sājan?' 'Nā, sakhī, tel'.

५)
बैसाख में मेरे धिग आबत है, मो को नंगो सेज पे दारत है
नाहिन सोबन डेट, ना सूबे अधर्मी 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, गर्मी'।

Baisākh meṅ mere ḍhig ābat hai, Mo ko naṅgo sej pe ḍārat hai,
Nāhīṅ soban det, nā sobe adharmī, "E sakhī, sājan?" "Nā, sakhī, garmī."

६)
बखत, बेबखत बा की आस, रात दिना वो रहवत पास
मेरे मन को करात सब काम 'ऐ सखि साजन?' 'ना, सखि, राम'।

Bakhat, be-bakhat bā kī ās, Rāt dinā wok rahwat pās, 
Mere man ko karat sab kām, "E sakhī, sājan?" "Nā, sakhī, Rām."

७)
ऊँची अटारी पलंग बिछायो, सोते में मोरे सिर पर आयो 
खुल गेन अँखियाँ, भाई आनंद 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, चाँद'।

Ūṅchī atārī palaṅg bichhāyo, Sote meṅ more sir par āyo, 
Khul gaīṅ aṅkhiyāṅ, bhaī anand, E. sakhī, sājan? Nā sakhī "Chand."

८)
एक सजन वह खड़ा पियारा, जा से घर मोरा भया उजियारा। 
भोर भई तब बिदा मैंने किया। 'ऐ सखि साजन?' 'ना, सखि, दिया'।

Ek sajan woh kharā piyārā, Jā se ghar morā bhayā ujyārā, 
Bhor bhaī tab bidā maīṅ kīyā, "E sakhī, sājan?" "Nā sakhī, dīyā."

९)
अति सुरंग है, रंग रंगीलो,  गुणवंत, चटकीलो
राम भजन बिन कभी ने सोता 'क्यों सखि, साजन?' 'ना, सखि, तोता'।

'Atī suraṅg hai, raṅg raṅgīlo, aur gunvaṅt, bahut chaṭkīlo, 
'Rām bhajan bin kabhī na sotā.' 'Kyoṅ sakhī, sajan?' 'Nā sakhī, totā.'

१०)
दूर दूर करूँ, ताऊ दौरा आवे, खन आँगन कहँ लाहर जावे
देहल छोर कहीं नहिं सुता 'क्यों सखि, साजन?' 'ना, सखि, कुत्ता'।

Dur dur karūṅ, tau dauṛā āve, Khan āṅgan, khan lāhar jāve, 
Dehal chhoṛ kahiṅ nahīṅ sūtā. 'Kyoṅ sakhī, sājan?' 'Nā sakhī, kūtā.'



आनंद आया. कह-मुकरी की एक विशेषता है. क्या आप बुझ पाए? कह-मुकरी  तीन पदों में ही उसका उत्तर छिपा है. अगली बार हम अमीर खुसरो की पांच कह-मुकरियाँ लेकर आएंगे, पर बिना उत्तर के. बूझो तो जानें की सखी बनकर आपको इन्हें बूझना है. सही बूझने का इनाम है संजय रावत द्वारा लिखी गयी 'पहेली बूझो और बनाओ' है. 

तो, बूझो तो जानें पर आते रहिये - अपनी लोकसंस्कृति की धरोहर जानने के लिए और साथ ही दिमागी कसरत करने के लिए …                  

यदि आप कह-मुकरी के बारे में और जानना चाहते हैं तो कह-मुकरी के इस पोस्ट को देखें. 
 


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