कह-मुकरी - २
कह-मुकरी की व्याख्या कुछ इस प्रकार है - कह-मुकरी का अर्थ है कुछ कहकर उससे मुकर जाना।
अमीर खुसरो द्वारा प्रणीत कह-मुकरी मूलतः दो सखियों के बीच संवाद है. पारम्परिक छंदों की तरह, पहले तीन पदों में एक सखी अपने प्रियतम (साजन) को याद करती जान पड़ती है. जब चौथे पद में उसकी सखी उसके कथनों से 'साजन' अभिप्राय लगाती है, तब पहली सखी अपनी बात से मुकर जाती है और पहले तीन पदों में कही अपनी बातों का कुछ और ही अर्थ बताती है. वह बहुत चालाकी से किसी और सामान्य वस्तु की ओर इशारा कर देती है.
आज, बूझो तो जानें आपके लिए अमीर खुसरो की कुछ कह-मुकरियाँ लेकर आया है.
१)
आप हिले अरु मोहे हिलावे, वाका हिलना मोरे मन भावे।
हिल-हिलाके होए निसंखा। 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, पंखा'।।
Āp hile aru mohe hilāve, Vākā hilnā more man bhāve,
२)
बात चलत मेरो अचरा गहे, मेरी सुने, ना अपनी कहे।
Bāṭ chalat mero achrā gahe, Merī sune, na apnī kahe,
३)
पी अपनो बस में है नहिन, जो मैं कहत करत है नहिन।
होंठ नहिन अपनों करे लाख जतन। 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, मन'।।
Pī apno bas meṅ hai nāheṅ, jo maiṅ kahat karat hai nāheṅ,
४)
लौंडी भेज उसे मंगवाया, नंगी होकर मैं लगवाया।
हम से उस से हो गया मेल। 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, तेल'।।
Lauṅḍī bhej use maṅgvāyā, Naṅgī ho-kar maiṅ lagvāyā,
५)
बैसाख में मेरे धिग आबत है, मो को नंगो सेज पे दारत है।
नाहिन सोबन डेट, ना सूबे अधर्मी। 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, गर्मी'।।
Baisākh meṅ mere ḍhig ābat hai, Mo ko naṅgo sej pe ḍārat hai,
६)
बखत, बेबखत बा की आस, रात दिना वो रहवत पास।
मेरे मन को करात सब काम। 'ऐ सखि साजन?' 'ना, सखि, राम'।।
Bakhat, be-bakhat bā kī ās, Rāt dinā wok rahwat pās,
७)
ऊँची अटारी पलंग बिछायो, सोते में मोरे सिर पर आयो।
खुल गेन अँखियाँ, भाई आनंद। 'ऐ, सखि, साजन?' 'ना, सखि, चाँद'।।
Ūṅchī atārī palaṅg bichhāyo, Sote meṅ more sir par āyo,
८)
Ek sajan woh kharā piyārā, Jā se ghar morā bhayā ujyārā,
९)
अति सुरंग है, रंग रंगीलो, गुणवंत, चटकीलो।
'Atī suraṅg hai, raṅg raṅgīlo, aur gunvaṅt, bahut chaṭkīlo,
१०)
दूर दूर करूँ, ताऊ दौरा आवे, खन आँगन कहँ लाहर जावे।
Dur dur karūṅ, tau dauṛā āve, Khan āṅgan, khan lāhar jāve,
आनंद आया. कह-मुकरी की एक विशेषता है. क्या आप बुझ पाए? कह-मुकरी तीन पदों में ही उसका उत्तर छिपा है. अगली बार हम अमीर खुसरो की पांच कह-मुकरियाँ लेकर आएंगे, पर बिना उत्तर के. बूझो तो जानें की सखी बनकर आपको इन्हें बूझना है. सही बूझने का इनाम है संजय रावत द्वारा लिखी गयी 'पहेली बूझो और बनाओ' है.
यदि आप कह-मुकरी के बारे में और जानना चाहते हैं तो कह-मुकरी के इस पोस्ट को देखें.
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