रविवार, 26 सितंबर 2010

खेल के मैदान से - २




खेल के मैदान से निमिष दुबे आपको छकाने के लिये फिर से कुछ प्रश्न लेकर आये हैं. आज का puzzle quest सचमुच कोई बच्चों का खेल नहीं है. ज़रा बूझो तो जानें...

१) ऐसा कौन सा खेल है जिसमे बाएं हाथ से खेलना वर्जित है?


२) ऐसा कौन सा खेल है जो आप किसी हाथ से नहीं खेल सकते?

३) ऐसा कौन सा खेल है जिसमें आमतौर पर न तो खिलाड़ियों को और न ही दर्शकों को यह पता चलता है कि किस खिलाड़ी को कितने अंक मिले हैं? 

४) ऐसा कौन सा खेल है जिसमें प्रतिद्वंदी एक दूसरे के कपड़े खींच सकते हैं?

५) ऐसा कौन सा खेल है जिसमें खिलाड़ी बोलिंग तो करते हैं, पर सामने कोई बल्लेबाज़ नहीं होता?


 
और मेरी तरफ से आखिरी  सवाल: इनमें से कौन से खेल दिल्ली में आयोजित XIX Commonwealth Games में प्रतिस्पर्धा खेल (competitive, medal game) हैं?

अन्य बार की तरह हम इस बार आपको उत्तर नहीं बता रहे हैं. इन प्रश्नों का सही उत्तर Commonwealth Games के समापन समारोह के बाद दिया जायेगा. 

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गुरुवार, 23 सितंबर 2010

ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द

मेरे मित्र असद  क़िदवाई ने कॉलेज के दिनों में हमें बहुत शेर-शायरियां सुनाई थीं, कुछ नरम, कुछ गरम, कुछ उच्च फलसफा वाली, तो कुछ आम ज़िन्दगी की पेचीदगियों के बारे में. इन सबमें एक शेर मुझे आज भी याद है. मुझे यकीन है नूह नारवी (?) का यह शेर आपको अच्छा लगेगा -
 
कई गुज़रे सन, तेरा कम था सिन, लिए हम ने सुन तेरे घुंघरू
गया सीना छन, गया दिल भी छिन, यूँही बोले छुन तेरे घुंघरू

इस शेर का मतलब मैं नहीं बताऊंगा. हाँ बूझने के लिए दो शब्दों का अर्थ ज़रूर बता देता हूँ--सन - साल और सिन - उम्र.

इस शेर की विशेषता शब्दों की अद्भुत जाल में है - सन, सिन, सुन - और उनके rhyming words के प्रयोग से - छन, छिन, छुन. आशिक़ मिज़ाजी से भरा यह शेर अपने शब्द-जाल के कारण शायद आज भी जुबां पर है.

पर बूझो तो जानें में शेर. और शेर भी बूझने की ज़रूरत नहीं, तो फिर क्या? आज मेरा आपसे एक सवाल है. इस पोस्ट के टाइटल 'ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द' क्या क्या मतलब है?

चकरा गए! मैं भी पहली बार चकरा गया था. इतना भारी-भरकम शब्द, तो इसका मतलब भी वज़नदार होगा. अंग्रेजी में ऐसे शब्दों को Onomatopoeia कहते हैं. बूझ पाए क्या? शायद यह भी उतना ही भारी है! चलिए मैं बताता हूँ. आम बोलचाल की भाषा में कहें तो ध्वनि बताने वाले शब्द (Sound Words). पर क्या इनका इतना भारी-भरकम नाम ज़रूरी है.

मनुष्यों के मुंह से निकलने वाली विभिन्न प्रकार की ध्वनियों ने तो क्रमशः भाषा का रूप ले लिया है, परन्तु पशु-पक्षी जो बोलते हैं, उसका क्या?

हाथी भी तो चिंग्घारकर अपनी बात कहता है और कौवा कॉव-कॉव कर बोलता है. यहाँ तक की बिना प्राण वाली वस्तुएं भी कुछ विशेष प्रकार की ध्वनि निकालती हैं. चूड़ियाँ एक दूसरे से टकराने पर खनखनाती हैं और दांत भय या ठण्ड के कारण कटकटाते हैं. और ऊपर घुंघरू भी तो कुछ कह गयी. 

हाथी और कौवे की बोली को बताने वाला शब्द या फिर निर्जीव वस्तुओं से निकली हुई ध्वनि के सूचक शब्द ही ध्वनि शब्द हैं या फिर यूँ कहें तो ये ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द हैं. अधिकाँश भारतीय भाषाओँ में हमें इस तरह के ध्वनि-सूचक शब्द मिलते हैं.

क्या आपसे बिना सन लगाये, सिन गुज़ारे, मैं कुछ ध्वनि-सूचक शब्द पूछ सकता हूँ जिससे की हम सबका मन भी छन जाय, समय अगर छिन भी जाय तो कोई गम न हो और घुंघरू फिर छुन से बोले!

तो इन पशु-पक्षियों की क्या बोली है - गाय, भैंस, मेढक, बिल्ली, कुत्ता, घोड़ा, बकरी, मुर्गी, कोयल, पपीहा, बतख, हंस, गौरैया.

और इन बिना प्राण वाली वस्तुओं के sound words क्या हैं? - बादल, बिजली, हवा, पेड़ों के पत्ते, घड़ी, दिल, घंटा, सिक्कों की आवाज़. 

या फिर इन क्रियाओं के? दरवाज़े पर दस्तक देना, ऊँचा/तेज/निरंतर या बिना मतलब के बोले जाना, तेज़ हवा का बहना, किसी का ज़मीन पर गिर जाना, पर्वतीय क्षेत्र में पानी का बहना, पक्षी का उड़ जाना और उड़ते रहना
. है न यह मनोरंजक शब्द के भंडार की शुरुआत.

इस बार बूझो तो जानें नहीं, बल्कि खोजो और लिख भेजो...तो चलें, इस सूची में भारत की सब भाषाओँ से शब्द जोड़ें और ध्वनि-शब्दों का 'ध्वन्यात्मक द्विरुक्ति मूलक शब्द' जितना भारी-भरकम भंडार बनायें...

एक संकेत दे दूँ - कुछ ध्वनि शब्द के अपने नाम हैं जैसे चिंग्घारना और कुछ तो उनकी बोली ही है, जैसे कॉव-कॉव या फिर धातु (metal) के बर्त्तन गिरने पर ठण-ठण की आवाज़ निकलना. कुछ ध्वनि-सूचक शब्दों के नाम भी हैं और उनके ध्वनि शब्द भी, जैसे भौरे की बोली को हम गुंजन भी कहते हैं और गुन-गुन भी. इन्हें जुड़वाँ शब्द भी कहते है. ('बूझो तो जानें' में जुड़वाँ शब्द के लिये यहाँ देखें)

इस खोज में मज़ा और भी आएगा जब भारतीय भाषा के ध्वनि शब्द के अंग्रेजी equivalent भी साथ में लिख भेजें, खासकर, निर्जीव वस्तुओं के ध्वनि शब्द...
 
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बुधवार, 22 सितंबर 2010

जुड़वाँ शब्द

जुड़वाँ शब्द उन शब्दों को कहा जाता है जो सामान्यतः एक साथ प्रयोग में आते हैं. इन शब्दों का अपने आप में, अकेले कोई अर्थ नहीं होता. 'कॉव' से शायद कुछ समझ न आये, पर 'कॉव-कॉव' बोलते ही हम समझ जाते हैं कि यह कौवे की बोली है. अधिकतर इस तरह के शब्द ध्वनि बताने वाले शब्द हैं.

चूँकि जुड़वाँ शब्द ध्वनि सूचक शब्द (sound words) हैं, इसलिए इसमें लय है और तुकबंदी (rhyming) की बहुत संभावनाएं. इससे जुड़वाँ शब्दों के खेल का विकास भी हुआ है. इस खेल में बच्चे-बड़े एक दूसरे से सजीव और निर्जीव दोनों की बोली के बारे में पूछ सकते हैं. एक बार जुड़वाँ शब्दों का भण्डार मिल जाय तो हम इनसे कविता भी बना सकते हैं.

बिल्ली -  म्याऊँ-म्याऊँ
कुत्ता - भौं- भौं
गौरैया - चीं-चीं
कौवा - कॉव-कॉव
भौरे - गुन-गुन

दरवाज़े पर दस्तक देना - खट-खट
ऊँचा/तेज/निरंतर या बिना मतलब के बोले जाना - बड़-बड़
तेज़ हवा का बहना - सन-सन या सर-सर
पर्वतीय क्षेत्र में पानी का बहना - झर-झर
पक्षी का उड़ना - फर-फर

दांत - कट-कट
तारे - टिम-टिम
सिक्कों की आवाज़ - खन-खन
हुक्का - गुड-गुड
ढोल - ढम-ढम
डमरू - डुग-डुग

ध्वनि शब्दों के अलावा भी कुछ जुड़वाँ शब्द क्रिया (कुछ करने से जो होता है) बताने वाले शब्द भी है. जैसे बॉल ज़मीन पर धम-धम कर गिरती है, रेल छुक-छुक कर चलती है या लट्टू गोल-गोल घूमता है, इत्यादि.  हैं न यह मनोरंजक शब्द के भंडार की शुरुआत.

इस बार बूझो तो जानें नहीं, बल्कि खोजो और लिख भेजो...तो चलें, इस सूची में भारत की सब भाषाओँ से शब्द जोड़ें और जुड़वाँ शब्दों का भंडार बनायें...

इस खोज में मज़ा और भी आएगा जब भारतीय भाषा के ध्वनि शब्द के अंग्रेजी equivalent भी साथ में लिख भेजें...
 
लिख भेजो तो जानें...

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सोमवार, 20 सितंबर 2010

 वह कौन सी चीज़ है जो...२

१) ...बारिश नीचे आते ही ऊपर चला जाता है?

२) ...सारा कमरा तो भर देता है, पर जगह बिलकुल नहीं लेता?

३) ...भरी भी जाती है और निकली भी?
 






 

उत्तर के लिए नीचे स्क्रोल करें:
 

१) छाता

२) प्रकाश

३) मांग

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बुधवार, 15 सितंबर 2010

अपनी इच्छाओं का क्या करें?
 

हर मनुष्य के जीवन की प्रेरणाएं उसकी इच्छाएं होती हैं - कभी प्रबल, कभी क्षीण, कभी मानवीय, कभी स्वार्थपरक. हममें जानने की इच्छा है (जिज्ञासा) और इसलिए हम इच्छाओं के बारे में जानने के इच्छुक हैं.

संस्कृत में में विभिन्न प्रकार की इच्छाओं के लिए विशेष नाम हैं. इनमें से कुछ तत्सम शब्द के रूप में आज भी हिंदी में प्रयोग में हैं, किन्तु बहुत कम.  


आमतौर पर जिस तरह इच्छाओं की पूर्ति कठिन होती है, ठीक उसी तरह कुछ इच्छा-सूचक नाम भी कठिन हैं, पर साथ ही मनोरंजक भी और आपको अपने मित्रों को छकाने में सहायक होंगे. ज़रा बूझो तो जानें:

१) करने की इच्छा
२) पाने की इच्छा रखने वाला
३) छीन लेने की इच्छा
४) जो जीने की इच्छा करता हो
५) जीतने की इच्छा
६) तैरने की इच्छा
७) देखने की इच्छा
८) खाने की इच्छा
९) मोक्ष की इच्छा रखने वाला
 
१०) मरने की इच्छा रखने वाला
११) जो बदला लेना चाहता हो
१२) जो युद्ध के लिये लालायित है
१३) जो यज्ञ की अभिलाषा रखता हो
१४) जो सेवा करने की इच्छा रखता हो
१५) जो सहने की शक्ति रखता हो

१६) प्यासा या पाने की इच्छा रखने वाला  


 
उत्तर के लिये नीचे स्क्रोल करें:
१) करने की इच्छा - चिकीर्षा
२) पाने की इच्छा रखने वाला - प्रपित्सु
३) छीन लेने की इच्छा - जिहीर्षा
४) जो जीने की इच्छा करता हो - जिजीविषु
५) जीतने की इच्छा - जिगीर्षा
६) तैरने की इच्छा - तितीर्षा
७) देखने की इच्छा - दिदृक्षा
८) खाने की इच्छा - बुभुक्षा
९) मोक्ष की इच्छा रखने वाला - मुमुक्षु 

१०) मरने की इच्छा रखने वाला - मुमूर्षु 
११) जो बदला लेना चाहता हो - प्रचिकीर्षु
१२) जो युद्ध के लिये लालायित है - युयुत्सु
१३) जो यज्ञ की अभिलाषा रखता हो - यियसु
१४) जो सेवा करने की इच्छा रखता हो - शुश्रुषु
१५) जो सहने की शक्ति रखता हो - सहिष्णु 

१६) प्यासा या पाने की इच्छा रखने वाला- पिपासु 




आपको भी यदि इस तरह के अलग एवं मनोरंजक शब्द मिलें तो हमें ज़रूर bujhotojaane@gmail.com पर भेजें.

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रविवार, 5 सितंबर 2010

दो-सुखना या संबंध पहेली

विलक्षण प्रतिभा के धनी और अपने समय में सामाजिक सद्भाव बढ़ाने के लिए अमीर खुसरो (१२५३ - १३२५) ने एक नयी भाषा, नयी सोच को जन्म दिया। अपनी बात को सहजता से आम लोगों तक पहुँचाने के लिए खुसरो ने विभिन्न भाषाओँ से शब्द लिए और अनेक नयी विधाओं का भी आविष्कार किया। 'दो-सुखना' भी उन्हीं में से एक है।  

खुसरो ने 'सुखन' शब्द फारसी भाषा से लिया है। 
'सुखनका 
अर्थ है 'कथन' या ' वार्ता'। दो-सुखना का अर्थ है, दो कथनों में कही गयी एक ही बात  जिसका उत्तर एक ही है।

दो-सुखना में दो परस्पर अलग वस्तुओं के बारे में प्रश्न पूछा जाता है। उनके बीच का संबंध या, यूँ कहें तो, समानता का बिंदु ढूढ़ना पड़ता है। चलिए, एक संकेत देता हूँ। इन दो वस्तुओं के बीच का संबंध एक शब्द है जो क्रिया के रूप में प्रयुक्त होता है जो उन दो अलग-अलग वस्तुओं के बीच का संबंध दिखाता है। यही दो-सुखना का आधार है।    

दो-सुखना को, निस्बत को एवं फारसी से आये चिस्तान (वह कौन-सी चीज़ है, वह कौन है, वह क्या है, वह क्या है, वह कौन-सा, वह कौन-सी… पर आधारित प्रश्न) को, पारम्परिक परिभाषा के

आधार पर पहेली नहीं कह सकते हैं। मूलतः अमीर खुसरो की देन - दो-सुखना एवं निस्बत, और चिस्तान, प्रश्न पर आधारित बुझौवल हैं। अंग्रेजी में दो-सुखना का कोई समतुल्य riddle प्रश्न नहीं है। 

जो भी हो, इन प्रश्नों पर आप और हम माथापच्ची करते हैं, दिमागी कसरत करते-करवाते हैं और 

ठीक उसी तरह इन नयी प्रकार की पहेलियों का उत्तर खोजने का प्रयास करते हैं जैसे पहेली बूझने में। 

दो-सुखना से मनोरंजन होता है और ज्ञान-वर्द्धन भी - शब्द सम्पदा बढ़ती है और एक शब्द के विभिन्न अर्थों/प्रयोगों से परिचय होता है। इस तरह के पहेली प्रश्न समस्या को सुलझाने की क्षमता (problem solving aptitude) को विकसित करने में सहायक होते हैं। 

तो आइये, खुसरो द्वारा बनाई गई दो-सुखनों से मिलते हैं। दो-सुखना को लोकप्रिय बनाने के लिए
खुसरो द्वारा रचित दो-सुखना पहेलियाँ उत्तर सहित नीचे दी गई हैं: 

१) रोटी जली क्यों? घोडा अड़ा क्यों?
- 'फेरा' न था। रोटी को पलटा नहीं था और घोड़े को मोड़ा नहीं था।

२) समोसा क्यों न खाया? जूता क्यों न चढ़ाया?
- 'तला' न था। समोसे को तेल में तला नहीं था और जूते के नीचे वाला हिस्सा नहीं था। 

३) रोटी क्यों सूखी? बस्ती क्यों उजड़ी?
- 'खाई' न थी। रोटी बिना खाये रह गयी थी और बस्ती के चारों ओर सुरक्षा के लिये खाई नहीं थी। 

४) सितार क्यों न बजा? औरत क्यों न नहाई? 
- 'पर्दा' न था। सितार के डाँड पर धातु के मोटे तार या ताँत से बँधे रहते हैं जिन्हें पर्दा कहते हैं। इसके बिना सितार नहीं बज सकता। औरत के पास नहाने के लिये कपड़े का पर्दा या ओट नहीं था। खुसरो के समय औरतें पर्दा लगा कर नहाती थीं।

५) पानी क्यों न भरा? हार क्यों न पहना?
- 'घड़ा' न था। पानी रखने के लिये बर्तन नहीं था और हार तैयार नहीं हुआ था।  

६) घर क्यों अँधियारा? फकीर क्यों बिगड़ा?
- 'दिया' न था। घर में दीपक नहीं था और फकीर को कुछ भिक्षा (भीख) नहीं दी थी। 

७) राही प्यासा क्यों? गधा उदासा क्यों?
- 'लोटा' न था। राही (मुसाफिर) इसलिए प्यासा था क्योंकि उसके पास पानी पीने के लिये बर्तन (लोटा)
नहीं था। गधा इसलिए उदास था क्योंकि वह ज़मीन पर 'लोटा' नहीं था - उसने घास पर लोटपोट नहीं किया था

८) दीवार क्यों टूटी? राह क्यों लूटी?
- 'राज' न था। दीवार बनाने वाला राज मिस्त्री नहीं था. राज्य व्यवस्था नहीं होने के कारण राहों पर सुरक्षा का कोई इंतज़ाम नहीं था।  

९) घोड़ा क्यों अड़ा? पान क्यों सड़ा? 
- 'मोड़ा' न था। घोड़े को घुमाया-फिराया नहीं था और पान को पलटा नहीं था।

१०) जोगी क्यों भागा? ढोलकी क्यों न बजी? 
- 'मढ़ी' न थी। जोगी के रहने के लिए झोंपड़ी (मढ़ी) या कुटी न थी और ढोल पर चमड़ा नहीं चढ़ाया (मढ़ी) गया था।

११) गोश्त क्यों न खाया? डोम क्यों न गाया? 
- 'गला' न था। मांस ठीक से पका नहीं था - कच्चा था, गला नहीं था - इसलिए नहीं खाया। डोम के पास गाने के योग्य गला नहीं था।

१२) अनार क्यों न चखा? वज़ीर क्यों न रखा?
- 'दाना' न था। अनार के अंदर दाना नहीं निकला। वज़ीर इसलिए नहीं रखा क्योंकि कोई बुद्धिमान व्यक्ति नहीं मिला। 

१३) पोस्ती क्यों रोया? चौकीदार क्यों सोया? 
- 'अमल' न था. अफीम का नशा करने वाले पोस्ती के पास नशा करने के लिए अफीम नहीं था। चौकीदार इसलिए सोया क्योंकि उस समय उसके पहरे का समय नहीं था। 

१४) दही क्यों न जमा? नौकर क्यों न रखा? 
- 'जामिन' न था। दही जमाने के लिए जामिन नहीं था। नौकर के लिए कोई ज़मानत देने वाला नहीं था।       


१५) ब्राह्मण क्यों नहीं नहाया? धोबन क्यों पिटी?
- 'धोती' न थी। नहाकर पहनने के लिए धोती न थी, इसलिए ब्राह्मण नहीं नहा पाया। धोबिन कपड़ों को नहीं धोती थी।


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अच्छा लगा! तो अपने परिवार और मित्रों के बीच दो-सुखना संबंध पहेली को प्रसारित करें। और आप भी इस तरह के संबंध पहेली बना कर लिख भेजें। आपके नाम सहित इसे बूझो तो जानें पर मैं प्रकाशित करूँगा।  अपनी प्रतिक्रिया और पहेलियाँ इस पते  पर भेजें - bujhotojaaneATgmailDOTcom   


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यह पोस्ट ५ सितंम्बर २०१० में लिखे दो-सुखना पोस्ट का संशोधित एवं परिवर्द्धित संस्करण है जिसमें १३ अक्टूबर २०१५ को परिवर्तन किया गया है। 

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